कार्यक्रम

ध्यान दें ः निम्नलिखित परम पावन दलाई लामा की भारत और साथ ही विदेश के सार्वजनिक कार्यक्रमों दोनों की सूची है। कृपया ध्यान दें कि इनमें से कई कार्यक्रमों के लिए प्रवेश टिकट की आवश्यकता होती है। लोगों से अनुरोध है कि वे सीधे आयोजकों से संपर्क करें अथवा टिकट संबंधित अतिरिक्त जानकारी के लिए नीचे दिए गए वेबसाइट पर जाएँ। साधारणतया भारत में अधिकांश कार्यक्रम निशुल्क होते हैं, जबकि विदेशों में अधिकांश कार्यक्रमों के लिए टिकट का भुगतान करने की आवश्यकता होती है। आपकी जानकारी के लिए, एक दीर्घ समय से चली आ रही नीति के अनुसार परम पावन दलाई लामा अपने व्याख्यानों के लिए कोई शुल्क स्वीकार नहीं करते। जहाँ टिकट खरीदे जाने की आवश्यकता है, हमारे कार्यालय की ओर से आयोजकों से यह अनुरोध किया जाता है कि वे अपने खर्च को पूरा करने हेतु न्यूनतम प्रवेश शुल्क लें। कृपया ध्यान दें कि नीचे दिए गए दिनांकों में परिवर्तन की संभावना है।

 २०१७

कालचक्र, जनवरी ३ से १४ तक, बोधगया, बिहार, भारत: परम पावन केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के कशाग के अनुरोध पर कालचक्र प्रदान करेंगे। कालचक्र के पहले तीन दिनों के दौरान, जनवरी ३ से ५ तक, परम पावन दलाई लामा, नमज्ञल महाविहार के भिक्षुओं तथा वरिष्ठ भिक्षुओं के साथ अनुष्ठान करेंगे, जो भूमि स्थल को तैयार तथा उसका शुद्धीकरण करेगा। इनमें प्रार्थनाओं के सस्वर पाठ, रेत मंडल का निर्माण तथा अन्य अनुष्ठान शामिल हैं। जनवरी ६ से ८ तक, परम पावन, शांतिदेव के बोधिसत्वचर्यावतार और कमलशील के भावना क्रम पर प्रारंभिक प्रवचन देंगे। जनवरी ९ को नमज्ञल महाविहार के भिक्षुओं द्वारा कालचक्र आनुष्ठानिक नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। परम पावन, जनवरी १० - १३ तक, कालचक्र अभिषेक प्रदान करेंगे। जनवरी १४ को एक दीर्घायु अभिषेक और परम पावन दलाई लामा की दीर्घायु के लिए एक दीर्घायु समर्पण प्रार्थना का समारोह होगा। (टिप्पणी: परम पावन प्रारंभिक शिक्षाओं में एक अतिरिक्त दिवस जोड़कर ५ जनवरी से प्रारंभ करने पर विचार कर रहे हैं। यदि इस की पुष्टि हो जाए तो जनवरी २ को भूमि स्थल अनुष्ठान प्रारंभ होगा। इस संबंध में निर्णय प्रारंभ होने के कुछ दिनों पहले ही ले पाना संभव होगा। हम अनिश्चितता के लिए क्षमाप्रार्थी हैं।) ( अतिरिक्त टिप्पणी: आप में से जो अनुवाद को सुन रहे हैं, कृपया सुनिश्चित कर लें कि आप अपना एफ एम रेड़ियो लेकर आएँ, क्योंकि बोधगया में रेड़ियो का मिलना संभव न होगा।)

सार्वजनिक व्याख्यान, फरवरी ५, नई दिल्ली, भारत: परम पावन तालकटोरा स्टेडियम में समकालीन भारत में भारतीय प्रज्ञा को पुनर्जीवित करने पर एक सार्वजनिक व्याख्यान देंगे। यह व्याख्यान विद्यालोक द्वारा आयोजित किया जा रहा है जो एक भारतीय प्रज्ञा की पहल है जो प्रज्ञा, बौद्धिक और आध्यात्मिक जिज्ञासा की भारतीय धरोहर को जागृत करने के लिए प्रेरित करती है। संपर्क वेबसाइट: www.vidyaloke.in

प्रवचन, मार्च १२, धर्मशाला, हि. प्र., भारतः
परम पावन प्रातः मुख्य तिब्बती मंदिर में जातक कथाओं से एक छोटा प्रवचन देंगे।

प्रवचन, १३ और १४ मार्च, धर्मशाला, हि. प्र., भारतः परम पावन प्रातः मुख्य तिब्बती मंदिर में कमलशील के भावनाक्रम और ज्ञलसे थोगमे संगपो के बोधिसत्व के ३७ अभ्यास पर दो दिवसीय प्रवचन देंगे।

सम्मेलन, १७ और १८ मार्च, राजगीर, बिहार, भारत: परम पावन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित २१वीं सदी में बौद्ध धर्म की प्रासंगिकता पर ३ दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मिलित होंगे।

सार्वजनिक व्याख्यान, मार्च १९, भोपाल, मध्य प्रदेश, भारतः
परम पावन मध्य प्रदेश सरकार के आनंद विभाग द्वारा आयोजित पूर्वाह्न विधानसभा सभागार में आर्ट ऑफ हैप्पिनस (सुख की कला) पर एक सार्वजनिक व्याख्यान देंगे।

सार्वजनिक व्याख्यान, अप्रैल १, गुवाहाटी, असम, भारतः असम ट्रिब्यून के प्लेटिनम जयंती समारोह के समापन कार्यक्रम के अंतर्गत परम पावन आईटीए सेंटर फॉर पर्फोमिंग ऑर्ट्स में मध्याह्न ए ह्यूमन एप्रोच टु वर्ल्ड पीस (विश्व शांति पर एक मानवीय दृष्टिकोण) पर एक सार्वजनिक व्याख्यान देंगे।

सार्वजनिक व्याख्यान, अप्रैल २, गुवाहाटी, असम, भारतः परम पावन, आधुनिक समय में प्राचीन भारतीय ज्ञान पर एक सार्वजनिक व्याख्यान देंगे और प्रातः आईआईटी गुवाहाटी परिसर में अपनी आत्मकथा माई लैंड और माई पीपुल का भी विमोचन करेंगे जिसका असमिया में अनुवाद किया गया है।

सार्वजनिक व्याख्यान, अप्रैल ३, दिब्रूगढ़, असम, भारतः परम पावन दिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में प्रातः एक व्याख्यान देंगे।

मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा, अप्रैल ४, लुमला, अरुणाचल प्रदेश, भारतः परम पावन प्रातः एक नूतन तारा मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा करेंगे।

प्रवचन, अप्रैल ५ से ७, तवांग, अरुणाचल प्रदेश, भारत: परम पावन अप्रैल ५ और ६ की प्रातः यिगा छोजिन में कमलशील के भावनाक्रम और ज्ञलसे थोगमे संगपो के बोधिसत्व के ३७ अभ्यास पर प्रवचन देंगे। अप्रैल ७ की प्रातः परम पावन यिगा छोजिन में रिगजिन दोनडुब की दीक्षा प्रदान करेंगे।

प्रवचन, अप्रैल १०, दिरंग, अरुणाचल प्रदेश, भारत: परम पावन गेशे लंगरी थंगपा के चित्त शोधन के अष्ट पदों और गुरु योग पर प्रवचन देंगे और थुबसुंग दरज्ञेलिंग विहार में अवलोकितेश्वर अनुज्ञा प्रदान करेंगे।

प्रवचन, अप्रैल ११, बोमदिला, अरुणाचल प्रदेश, भारत: परम पावन प्रातः बुद्ध उपवन में व्याख्यान देंगे और श्वेत तारा दीर्घायु अभिषेक प्रदान करेंगे।

व्याख्यान, अप्रैल १२, इटानगर, अरुणाचल प्रदेश, भारत: परम पावन प्रातः थुबतेन गछेल लिंग में प्रवचन देंगे।

प्रवचन, मई ११, मनाली, हि. प्र., भारत: परम पावन बौद्ध धर्म पर एक परिचयात्मक प्रवचन देंगे और प्रातः ञिङमापा मन्दिर में अमितायुस का दीर्घायु अभिषेक प्रदान करेंगे।

प्रवचन, मई १३ और १४, जिस्पा, हि. प्र., भारत: परम पावन १३ मई को शांतिदेव के बोधिसत्वचर्यावतार पर प्रवचन देंगे। १४ मई की प्रातः परम पावन श्वेत तारा अनुज्ञा प्रदान करेंगे।

प्रवचन, मई १५, त्रिलोकनाथ (फगपा), हि. प्र., भारत: परम पावन प्रातः चतुर्भुज अवलोकितेश्वर अनुज्ञा प्रदान करेंगे।
 
व्याख्यान, मई १६ से १८, धनकर, हि. प्र., भारत: परम पावन मई १६ और १७ को जे चोंखापा के 'महाबोधिपथक्रम' पर प्रवचन देंगे। मई १८ की प्रातः परम पावन अवलोकितेश्वर अभिषेक प्रदान करेंगे।

प्रवचन, मई १९, ताबो, हि. प्र., भारत: परम पावन अवलोकितेश्वर के गुरु योग पर प्रवचन देंगे।

प्रवचन, मई २०, चंगो, हि. प्र., भारत: परम पावन मध्याह्न में एक प्रवचन देंगे।

व्याख्यान, मई २१, पूह, हि. प्र., भारत: परम पावन एक लघु व्याख्यान देंगे और श्वेत तारा दीर्घायु अभिषेक प्रदान करेंगे।

व्याख्यान, मई २२ से २४, कल्पा, हि. प्र., भारत: परम पावन मई २२ और २३ को नागार्जुन की रत्नावली पर प्रवचन देंगे और मई २४ को अवलोकितेश्वर अनुज्ञा प्रदान करेंगे।

प्रवचन, २९ अगस्त से १ सितंबर, धर्मशाला, हि. प्र., भारतः परम पावन प्रातः मुख्य तिब्बती मंदिर में एशिया के एक समूह, जिसमें इंडोनेशिया, कोरिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं, के अनुरोध पर मूल मध्यमककारिका पर बुद्धपालित के भाष्य पर प्रवचन देंगे।



 

 

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भारत को गांवों के विकास पर ध्यान देना चाहिए: दलाई लामा भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत, १९ मार्च २०१७ (पीटीआई) - भारत को समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए गांवों के विकास पर ध्यान देना चाहिए, तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने रविवार के दिन कहा "भारत की समृद्धि बड़े शहरों के विकास के बजाय गांवों के विकास पर निर्भर करती है। अतः विकास की यात्रा देश के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रारंभ होनी चाहिए," दलाई लामा ने मध्य प्रदेश के देवास जिले के तुरनल गांव में एक सभा को बताया।

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