परम पावन ने लिखा, “कर्नाटक में 30,000 से ज़्यादा निर्वासित तिब्बती रहते हैं, जो भारत में तिब्बती समुदाय की सबसे बड़ी आबादी है। हम राज्य और वहाँ के लोगों की अटूट मित्रता एवं उदार सहयोग के लिए बहुत आभारी हैं। यह बड़े गर्व की बात है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान की नालंदा परंपरा पर आधारित हमारे मुख्य अध्ययन केंद्र कर्नाटक में स्थापित हुए हैं।
“मैं इस मौके पर कर्नाटक सरकार तथा राज्य के लोगों का ह्रदय की गहराई से धन्यवाद व्यक्त करना चाहता हूँ कि उन्होंने वहाँ बसे तिब्बती समुदाय का बड़े स्नेह और आतिथ्य के साथ स्वागत किया।
"मैं कामना करता हूँ कि आप भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए कर्नाटक के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करेंगे तथा विशेष रूप से राज्य के सबसे वंचित और कमजोर नागरिकों के जीवन में सार्थक एवं सकारात्मक परिवर्तन लाने में सफल होंगे।"
परम पावन ने अपनी प्रार्थनाओं और शुभकामनाओं के साथ अपनी बात समाप्त की।










