मेरे 91वें जन्मदिन पर आप सभी की शुभकामनाओं के लिए मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ। जैसा कि मैंने 6 जुलाई को लेह, लद्दाख, भारत में एकत्र लोगों से कहा था, जब मैं अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो पाता हूँ कि मेरी साधना का मुख्य उद्देश्य दूसरों का भला करना रहा है। यही वह निस्वार्थ भावना है जिसके साथ मैं हर दिन उठता हूँ।
करुणा और दया का प्रसार करना मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य है। हमारे विश्व को सभी के लिए बेहतर स्थान बनाने के लिए ऐसी सोच बहुत ज़रूरी है। इसलिए, मैं हर जगह अपने भाइयों और बहनों से—चाहे वे युवा हों या बुजुर्ग—आग्रह करता हूँ कि वे दूसरों की भलाई की सच्ची चिंता करते हुए प्रेम और करुणा का भाव अपनाएँ। मेरा मानना है कि ऐसा कर पाना ही सेवा-भाव से भरा एक सार्थक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीना है।
जैसा कि आप जानते होंगे, पिछले महीने नई दिल्ली में मेरे बाएँ घुटने की सफल चिकित्सा प्रक्रिया के बाद से मैं यहाँ लद्दाख में स्वास्थ्य लाभ कर रहा हूँ। विगत वर्षों की तरह, मुझे वर्ष के इस समय यहाँ का मौसम मेरे स्वास्थ्य के लिए बहुत अनुकूल लगता है, और इसलिए मेरी योजना अगले कुछ हफ़्तों तक लद्दाख में ही रहने की है।
मेरी प्रार्थनाओं और शुभकामनाओं के साथ
दलाई लामा
8 जुलाई 2026










