साइतामा, जापान की यात्रा

परम पावन दलाई लामा की नवंबर २६, २०१६ को साइतामा, जापान में साइतामा चिकित्सा विश्वविद्यालय तथा अस्पताल की यात्रा के चित्र
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साइतामा, जापान की यात्रा

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परम पावन चौदहवें दलाई लामा कार्यालय के आधिकारिक वेबसाइट में स्वागत। परम पावन तिब्बतीयों के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं। वे प्रायः कहते हैं कि उनका जीवन तीन प्रतिबद्धताओं से निर्देशित है: आधारभूत मानवीय जीवन मूल्यों का विकास अथवा मानवीय सुख के लिए धर्मनिरपेक्ष नैतिकता, धर्मों के बीच समन्वय की भावना और तिब्बती समुदाय के कल्याण का पोषण, जिस में उनकी अस्मिता, संस्कृति तथा धर्म पर केन्द्रितकर उन्हें जीवंत रखना।

यहाँ खोजें कि किस प्रकार परम पावन अपनी प्रतिबद्धताओं को अपनी विभिन्न गतिविधियों, अपने सार्वजनिक वक्तव्यों, व्यापक अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं तथा प्रकाशनों से पूरा करते हैं।


 

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तिब्बती तीर्थयात्री परम पावन दलाई लामा को चुगलगखंग में सुनते हुए तिब्बती तीर्थयात्री परम पावन दलाई लामा को चुगलगखंग में सुनते हुए
November 30th 2016
थेगछेन छोलिंग, धर्मशाला, हि. प्र., भारत, ३० नवंबर २०१६ - आज जब परम पावन दलाई लामा ने तिब्बत के लगभग १००० तीर्थयात्रियों से भेंट की, जिनमें से कई पारंपरिक वेशभूषा में थे और जिनके मुख आशा की भावना से खिले थे तो परम पावन ने उनसे कहा कि चूँकि वे तीर्थ यात्रा पर अथवा अपने परिजनों से मिलने भारत आए थे, उन्होंने सोचा कि उनके अपने घरों को लौटने से पहले वे उनसे बौद्ध धर्म के विषय में बात करेंगे। परम पावन ने उनसे कहा, "बौद्ध धर्म का प्रसारण तिब्बत के कोने-कोने में हुआ, पर कई लोग नहीं जानते कि बौद्ध धर्म क्या है ।

साइतामा चिकित्सा विश्वविद्यालय की यात्रा
November 26th 2016

जापान लौटने से पहले प्रेस के साथ भेंट
November 23rd 2016

युवाओं के साथ पारस्परिक बातचीत
November 21st 2016

 

कार्यक्रम


२०१७

कालचक्र, जनवरी ३ से १४ तक, बोधगया, बिहार, भारत: परम पावन केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के कशाग के अनुरोध पर कालचक्र प्रदान करेंगे। कालचक्र के पहले तीन दिनों के दौरान, जनवरी ३ से ५ तक, परम पावन दलाई लामा, नमज्ञल महाविहार के भिक्षुओं तथा वरिष्ठ भिक्षुओं के साथ अनुष्ठान करेंगे, जो भूमि स्थल को तैयार तथा उसका शुद्धीकरण करेगा। इनमें प्रार्थनाओं के सस्वर पाठ, रेत मंडल का निर्माण तथा अन्य अनुष्ठान शामिल हैं। जनवरी ६ से ८ तक, परम पावन, शांतिदेव के बोधिसत्वचर्यावतार और कमलशील के भावना क्रम पर प्रारंभिक प्रवचन देंगे। जनवरी ९ को नमज्ञल महाविहार के भिक्षुओं द्वारा कालचक्र आनुष्ठानिक नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। परम पावन, जनवरी १० - १३ तक, कालचक्र अभिषेक प्रदान करेंगे। जनवरी १४ को एक दीर्घायु अभिषेक और परम पावन दलाई लामा की दीर्घायु के लिए एक दीर्घायु समर्पण प्रार्थना का समारोह होगा। (टिप्पणी: परम पावन प्रारंभिक शिक्षाओं में एक अतिरिक्त दिवस जोड़कर ५ जनवरी से प्रारंभ करने पर विचार कर रहे हैं। यदि इस की पुष्टि हो जाए तो जनवरी २ को भूमि स्थल अनुष्ठान प्रारंभ होगा। इस संबंध में निर्णय प्रारंभ होने के कुछ दिनों पहले ही ले पाना संभव होगा। हम अनिश्चितता के लिए क्षमाप्रार्थी हैं।) ( अतिरिक्त टिप्पणी: आप में से जो अनुवाद को सुन रहे हैं, कृपया सुनिश्चित कर लें कि आप अपना एफ एम रेड़ियो लेकर आएँ, क्योंकि बोधगया में रेड़ियो का मिलना संभव न होगा।)

 
 

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