महाबोधि मंदिर की तीर्थयात्रा

परम पावन दलाई लामा के कालचक्र अभिषेक प्रदान करने हेतु उनकी उन्नीस दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन महाबोधि मंदिर की तीर्थयात्रा के चित्र, बोधगया, बिहार, भारत, जनवरी १५, २०१७
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महाबोधि मंदिर की तीर्थयात्रा

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परम पावन चौदहवें दलाई लामा कार्यालय के आधिकारिक वेबसाइट में स्वागत। परम पावन तिब्बतीयों के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं। वे प्रायः कहते हैं कि उनका जीवन तीन प्रतिबद्धताओं से निर्देशित है: आधारभूत मानवीय जीवन मूल्यों का विकास अथवा मानवीय सुख के लिए धर्मनिरपेक्ष नैतिकता, धर्मों के बीच समन्वय की भावना और तिब्बती समुदाय के कल्याण का पोषण, जिस में उनकी अस्मिता, संस्कृति तथा धर्म पर केन्द्रितकर उन्हें जीवंत रखना।

यहाँ खोजें कि किस प्रकार परम पावन अपनी प्रतिबद्धताओं को अपनी विभिन्न गतिविधियों, अपने सार्वजनिक वक्तव्यों, व्यापक अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं तथा प्रकाशनों से पूरा करते हैं।


 

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अवलोकितेश्वर अनुज्ञा, दीर्घायु सर्मपण और कालचक्र अभिषेक का समापन अवलोकितेश्वर अनुज्ञा, दीर्घायु सर्मपण और कालचक्र अभिषेक का समापन
January 14th 2017
बोधगया, बिहार, भारत, १४ जनवरी २०१७- आज प्रातः जब परम पावन दलाई लामा ने कालचक्र मंदिर से नमज्ञल विहार की एक छोटी यात्रा तय की, तो पुनः एक बार उऩकी एक झलक पाने की आशा में दो या तीन मीटर गहन का जनमानस मार्ग पर पंक्तिबद्ध था।

कालचक्र अभिषेक का तीसरा व अंतिम दिन
January 13th 2017

कालचक्र अभिषेक का दूसरे दिन - शिशु प्रवृत्ति के सात अभिषेक
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कालचक्र अभिषेक का प्रथम दिवस - मंडल में प्रवेश
January 11th 2017

 

कार्यक्रम


२०१७

सार्वजनिक व्याख्यान, फरवरी ५, नई दिल्ली, भारत: परम पावन तालकटोरा स्टेडियम में समकालीन भारत में भारतीय प्रज्ञा को पुनर्जीवित करने पर एक सार्वजनिक व्याख्यान देंगे। यह व्याख्यान विद्यालोक द्वारा आयोजित किया जा रहा है जो एक भारतीय प्रज्ञा की पहल है जो प्रज्ञा, बौद्धिक और आध्यात्मिक जिज्ञासा की भारतीय धरोहर को जागृत करने के लिए प्रेरित करती है। संपर्क वेबसाइट: www.vidyaloke.in

प्रवचन, मार्च १२, धर्मशाला, हि. प्र., भारतः
परम पावन प्रातः मुख्य तिब्बती मंदिर में जातक कथाओं से एक छोटा प्रवचन देंगे।

 
 

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